हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.18.12

मंडल 7 → सूक्त 18 → श्लोक 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 18
अध॑ श्रु॒तं क॒वषं॑ वृ॒द्धम॒प्स्वनु॑ द्रु॒ह्युं नि वृ॑ण॒ग्वज्र॑बाहुः । वृ॒णा॒ना अत्र॑ स॒ख्याय॑ स॒ख्यं त्वा॒यन्तो॒ ये अम॑द॒न्ननु॑ त्वा ॥ (१२)
वज्रबाहु इंद्र ने श्रुत, कवष, वृद्ध द नाम के लोगों को पानी में डुबा दिया था. इस अवसर पर जिन्होंने तुम्हारी स्तुति की, उन्होंने मित्र बनकर तुम्हारी मित्रता प्राप्त की. (१२)
Vajrabahu Indra had immersed the people named Shrut, Kawash, Old Day in the water. Those who praised you on this occasion became friends with you and friendly you. (12)