हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.18.25

मंडल 7 → सूक्त 18 → श्लोक 25 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 18
इ॒मं न॑रो मरुतः सश्च॒तानु॒ दिवो॑दासं॒ न पि॒तरं॑ सु॒दासः॑ । अ॒वि॒ष्टना॑ पैजव॒नस्य॒ केतं॑ दू॒णाशं॑ क्ष॒त्रम॒जरं॑ दुवो॒यु ॥ (२५)
हे नेता मरुतो! पिता दिवोदास के ही समान राजा सुदास की भी सेवा करो एवं पिजवन के पुत्र सुदास के घर की रक्षा करो. सुदास की सेना जरारहित एवं अविनाशी हो. (२५)
O leader Maruto! Serve King Sudas, just like his father Divodas, and protect the house of Sudas, the son of Pijvan. Sudas's army should be without a sense of disrepair and indestructible. (25)