हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.19.9

मंडल 7 → सूक्त 19 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 19
स॒द्यश्चि॒न्नु ते म॑घवन्न॒भिष्टौ॒ नरः॑ शंसन्त्युक्थ॒शास॑ उ॒क्था । ये ते॒ हवे॑भि॒र्वि प॒णीँरदा॑शन्न॒स्मान्वृ॑णीष्व॒ युज्या॑य॒ तस्मै॑ ॥ (९)
हे धनस्वामी इंद्र! हम तुम्हारे यज्ञ में नेता और उक्थ बोलने वाले हैं. हम तुम्हें हव्य देने के साथ-साथ तुम्हें दान न देने वाले पणियों को भी दानशील बनाते हैं. तुम हमें मित्रता के लिए स्वीकार करो. (९)
O Dhanaswami Indra! We are the leader and the uqtha-speaker in your yajna. We give you a gift as well as make you charitable to non-charitable people. You accept us for friendship. (9)