हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.21.5

मंडल 7 → सूक्त 21 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 21
न या॒तव॑ इन्द्र जूजुवुर्नो॒ न वन्द॑ना शविष्ठ वे॒द्याभिः॑ । स श॑र्धद॒र्यो विषु॑णस्य ज॒न्तोर्मा शि॒श्नदे॑वा॒ अपि॑ गुरृ॒तं नः॑ ॥ (५)
हे इंद्र! राक्षस हमारी हिंसा न करें. हे अतिशय बली इंद्र! वे राक्षस हमें प्रजाहीन न बनावें. स्वामी इंद्र कुटिल व्यक्ति के मारने में उत्साह दिखाते हैं. ब्रह्मचर्यहीन लोग हमारे यज्ञ में बाधा न बनें. (५)
O Indra! Don't let the monsters do us violence. O very strong Indra! Let those demons not make us peopleless. Swami Indra shows enthusiasm in killing the devious person. Do not let the celibacyless people be an obstacle to our yajna. (5)