हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.22.4

मंडल 7 → सूक्त 22 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 22
श्रु॒धी हवं॑ विपिपा॒नस्याद्रे॒र्बोधा॒ विप्र॒स्यार्च॑तो मनी॒षाम् । कृ॒ष्वा दुवां॒स्यन्त॑मा॒ सचे॒मा ॥ (४)
हे इंद्र! मुझ सोमपानकर्ता के पत्थर की पुकार सुनो एवं स्तुति करने वाले विद्वान्‌ की स्तुति समझो. तुम मेरे सहायक बनकर मेरी इन सेवाओं को समझो. (४)
O Indra! Listen to the call of my sompaner's stone and understand the praise of the scholar who praises me. You understand these services of mine by becoming my assistant. (4)