हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.22.6

मंडल 7 → सूक्त 22 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 22
भूरि॒ हि ते॒ सव॑ना॒ मानु॑षेषु॒ भूरि॑ मनी॒षी ह॑वते॒ त्वामित् । मारे अ॒स्मन्म॑घव॒ञ्ज्योक्कः॑ ॥ (६)
हे इंद्र! मनुष्यों में तुम्हारे बहुत से सवन हैं. स्तोता तुम्हें ही अधिक बुलाता है. चिरकाल तक अपने को हमसे अलग मत रखना. (६)
O Indra! You have many of your friends among the human beings. The stota calls you more of the same. Don't keep yourself separate from us forever. (6)