हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.22.8

मंडल 7 → सूक्त 22 → श्लोक 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 22
नू चि॒न्नु ते॒ मन्य॑मानस्य द॒स्मोद॑श्नुवन्ति महि॒मान॑मुग्र । न वी॒र्य॑मिन्द्र ते॒ न राधः॑ ॥ (८)
हे दर्शनीय इंद्र! तुम्हारी स्तुतियां सुनकर तुम्हारी महिमा कौन नहीं जानेगा? हे उग्र इंद्र! तुम्हारी शक्ति और धन को कौन नहीं समझेगा. (८)
O seeable Indra! Who will not know your glory when he hears your praises? O furious Indra! Who will not understand your power and wealth? (8)