हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.23.1

मंडल 7 → सूक्त 23 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 23
उदु॒ ब्रह्मा॑ण्यैरत श्रव॒स्येन्द्रं॑ सम॒र्ये म॑हया वसिष्ठ । आ यो विश्वा॑नि॒ शव॑सा त॒तानो॑पश्रो॒ता म॒ ईव॑तो॒ वचां॑सि ॥ (१)
ऋषियों ने सब स्तुतियां अन्न पाने की अभिलाषा से कही हैं. हे वसिष्ठ! तुम भी स्तोत्र व हव्य द्वारा इंद्र की पूजा करो. जिस इंद्र ने अपनी शक्ति से समस्त लोकों को विस्तृत किया है, वे मुझ समीपगामी की स्तुतियां सुनें. (१)
The sages have spoken all the praises with the desire to get food. O Vasishtha! You also worship Indra through hymns and salutations. The Indra who has expanded all the realms with his power should hear the praises of the one near to me. (1)