हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.25.5

मंडल 7 → सूक्त 25 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 25
कुत्सा॑ ए॒ते हर्य॑श्वाय शू॒षमिन्द्रे॒ सहो॑ दे॒वजू॑तमिया॒नाः । स॒त्रा कृ॑धि सु॒हना॑ शूर वृ॒त्रा व॒यं तरु॑त्राः सनुयाम॒ वाज॑म् ॥ (५)
हम हरि नामक घोड़ों वाले इंद्र के लिए ये सुखकर स्तुतियां बनाते हैं एवं इंद्र से देवप्रेरित बल की याचना करते हैं. हम सभी दुःखों को पार करके बल प्राप्त करेंगे. हे शूर इंद्र! हमें सदा शत्रुहन में समर्थ बनाओ. हम अतिशय सुरक्षित होकर अन्न प्राप्त करें. (५)
We make these pleasant praises for the horse-clad Indra named Hari and ask for the divine force from Indra. We will overcome all sorrows and gain strength. O Shur Indra! Enable us to be hostile forever. Let us get food very safely. (5)