हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.26.3

मंडल 7 → सूक्त 26 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 26
च॒कार॒ ता कृ॒णव॑न्नू॒नम॒न्या यानि॑ ब्रु॒वन्ति॑ वे॒धसः॑ सु॒तेषु॑ । जनी॑रिव॒ पति॒रेकः॑ समा॒नो नि मा॑मृजे॒ पुर॒ इन्द्रः॒ सु सर्वाः॑ ॥ (३)
सोमरस निचुड़ जाने पर स्तोतागण जिन कमो का वर्णन करते हैं, इंद्र ने प्राचीन काल में वे सब कर्म किए हैं एवं इस समय अन्य कर्म भी करते हैं. पति जिस प्रकार पत्नी का मर्दन करता है, उसी प्रकार इंद्र ने अकेले ही शत्रुनगरियों को तहस-नहस कर डाला. (३)
The kamo that the stotas describe when the Somras go to Nikud, Indra has done all those deeds in ancient times and at this time he also does other karmas. Just as the husband marries the wife, Indra alone destroyed the enemy cities. (3)