हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.27.4

मंडल 7 → सूक्त 27 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 27
नू चि॑न्न॒ इन्द्रो॑ म॒घवा॒ सहू॑ती दा॒नो वाजं॒ नि य॑मते न ऊ॒ती । अनू॑ना॒ यस्य॒ दक्षि॑णा पी॒पाय॑ वा॒मं नृभ्यो॑ अ॒भिवी॑ता॒ सखि॑भ्यः ॥ (४)
हमने धनस्वामी एवं दानशील इंद्र को मरुतों के साथ बुलाया है. वे हमारी रक्षा के लिए शीघ्र ही अन्न दें. जो इंद्र स्तोताओं को संपूर्ण धन देते थे, वे ही मनुष्यों को उत्तम धन दे. (४)
We have called Dhanaswami and Dansheel Indra along with the Maruts. They soon give food to protect us. Those who gave all the wealth to the Indra Stotas, they would give the best wealth to human beings. (4)