हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.31.11

मंडल 7 → सूक्त 31 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 31
उ॒रु॒व्यच॑से म॒हिने॑ सुवृ॒क्तिमिन्द्रा॑य॒ ब्रह्म॑ जनयन्त॒ विप्राः॑ । तस्य॑ व्र॒तानि॒ न मि॑नन्ति॒ धीराः॑ ॥ (११)
बुद्धिमान्‌ लोग महान्‌ व्याप्ति वाले एवं महान्‌ इंद्र को लक्ष्य करके स्तुतियों एवं हव्य का निर्माण करते है. धीर पुरुष इंद्रसंबंधी व्रतों को न्ट नहीं करते हैं. (११)
Wise people create praises and greetings by aiming at the great indra and the great indra. Dhir purushas do not observe indrarshi vratas. (11)