हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.31.8

मंडल 7 → सूक्त 31 → श्लोक 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 31
तं त्वा॑ म॒रुत्व॑ती॒ परि॒ भुव॒द्वाणी॑ स॒याव॑री । नक्ष॑माणा स॒ह द्युभिः॑ ॥ (८)
हे इंद्र! तुम्हारे साथ चलने वाले तेजों के कारण व्याप्त होती हुई एवं स्तोताओं के वचनों से युक्त स्तुति तुम्हें प्राप्त हो. (८)
O Indra! May you receive praise that is pervaded by the brightness that goes on with you and containing the words of the psalms. (8)