ऋग्वेद (मंडल 7)
गि॒रा य ए॒ता यु॒नज॒द्धरी॑ त॒ इन्द्र॑ प्रि॒या सु॒रथा॑ शूर धा॒यू । प्र यो म॒न्युं रिरि॑क्षतो मि॒नात्या सु॒क्रतु॑मर्य॒मणं॑ ववृत्याम् ॥ (४)
हे शूर इंद्र! जो व्यक्ति तुम्हारे प्यारे, शोभनगति एवं भारवाहक हरि नामक घोड़ों को स्तुति करता हुआ रथ में जोड़ता है, तुम उसके यज्ञ में आओ. मैं उन शोभनकर्म वाले अर्यमा को स्तुति के द्वारा बुलाता हूं, जो हिंसा करने वाले मेरे शत्रु का क्रोध नष्ट करते हैं. (४)
O Shur Indra! Come to the yagna of the one who adds to the chariot praising your beloved, the horse bearer, the adornant and the load bearer Hari. I call through praise the virtuous Aryama who do violence, who destroy the wrath of my enemy who commits violence. (4)