हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 38
उदु॒ ष्य दे॒वः स॑वि॒ता य॑याम हिर॒ण्ययी॑म॒मतिं॒ यामशि॑श्रेत् । नू॒नं भगो॒ हव्यो॒ मानु॑षेभि॒र्वि यो रत्ना॑ पुरू॒वसु॒र्दधा॑ति ॥ (१)
सविता जिस स्वर्णमय रूप का आश्रय लेते हैं, उसीको उत्पन्न करते हैं। सूर्य निश्चय ही मनुष्यों द्वारा स्तुतियोग्य हैं. विविध संपत्तियों वाले सविता स्तोताओं को रमणीय धन देते हैं. (१)
Savita produces the golden form that she takes shelter in. The sun is certainly praiseworthy by humans. Savita with diverse properties gives delightful wealth to the stothas. (1)

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 38
उदु॑ तिष्ठ सवितः श्रु॒ध्य१॒॑स्य हिर॑ण्यपाणे॒ प्रभृ॑तावृ॒तस्य॑ । व्यु१॒॑र्वीं पृ॒थ्वीम॒मतिं॑ सृजा॒न आ नृभ्यो॑ मर्त॒भोज॑नं सुवा॒नः ॥ (२)
हे सविता! तुम उदय करो. हे सोने के हाथों वाले सविता! तुम हमारी अभिलाषा पूर्ण करने के लिए हमारा स्तोत्र सुनो. तुम विस्तृत एवं असीमित प्रभा उत्पन्न करते हो एवं स्तोताओं को मानवभोग योग्य धन देते हो. (२)
O Savita! You rise. O Savita with gold hands! Listen to our hymn to fulfill our desire. You create vast and unlimited wealth and give man-consuming money to the stoetas. (2)

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 38
अपि॑ ष्टु॒तः स॑वि॒ता दे॒वो अ॑स्तु॒ यमा चि॒द्विश्वे॒ वस॑वो गृ॒णन्ति॑ । स नः॒ स्तोमा॑न्नम॒स्य१॒॑श्चनो॑ धा॒द्विश्वे॑भिः पातु पा॒युभि॒र्नि सू॒रीन् ॥ (३)
हम सविता देव की स्तुति करें. सब देव जिनकी स्तुति करते हैं, वे ही नमस्कारयोग्य सविता हमारे स्तोत्रों एवं अन्नों को धारण करें तथा समस्त रक्षासाधनों द्वारा स्तोताओं की रक्षा करें. (३)
Let us praise Savita Dev. The only one whom all the gods praise, the salutation salutations may the faithful Savita wear our hymns and food grains and protect the hymns by all means of protection. (3)

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 38
अ॒भि यं दे॒व्यदि॑तिर्गृ॒णाति॑ स॒वं दे॒वस्य॑ सवि॒तुर्जु॑षा॒णा । अ॒भि स॒म्राजो॒ वरु॑णो गृणन्त्य॒भि मि॒त्रासो॑ अर्य॒मा स॒जोषाः॑ ॥ (४)
सविता देव की आज्ञा का पालन करती हुई अदिति देवी उनकी स्तुति करती हैं. भली प्रकार सुशोभित वरुण आदि उनकी स्तुति करते हैं. मित्र एवं अर्यमा समान प्रेम द्वारा उनकी स्तुति करते हैं. (४)
Aditi Devi praises Savita Dev by obeying her command. Well-beautified Varuna etc. praise him. Friends and Araima praise them with equal love. (4)

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 38
अ॒भि ये मि॒थो व॒नुषः॒ सप॑न्ते रा॒तिं दि॒वो रा॑ति॒षाचः॑ पृथि॒व्याः । अहि॑र्बु॒ध्न्य॑ उ॒त नः॑ श‍ृणोतु॒ वरू॒त्र्येक॑धेनुभि॒र्नि पा॑तु ॥ (५)
दान करने वाले एवं सेवानिपुण यजमान परस्पर संगत होकर स्वर्ग एवं धरती के मित्र सविता की सेवा करते हैं. अहिर्बुध्न्य हमारा स्तोत्र सुनें. सरस्वती प्रमुख धेनुओं द्वारा हमारा भली-भांति पालन करें. (५)
The donors and the service-abiding hosts serve Savita, the friend of heaven and earth, in harmony with each other. Listen to our hymns. Follow us well with the main axons of Saraswati. (5)

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 38
अनु॒ तन्नो॒ जास्पति॑र्मंसीष्ट॒ रत्नं॑ दे॒वस्य॑ सवि॒तुरि॑या॒नः । भग॑मु॒ग्रोऽव॑से॒ जोह॑वीति॒ भग॒मनु॑ग्रो॒ अध॑ याति॒ रत्न॑म् ॥ (६)
प्रजापालक सविता देव हमारी याचना सुनकर अपना प्रसिद्ध धन हमें दें. उग्र स्तोता हमारी रक्षा के लिए भग नामक देव को बार-बार बुलाता है. असमर्थ स्तोता भग से रत्न मांगता है. (६)
Prajpalak Savita Dev listen to our request and give us your famous wealth. The furious hymn repeatedly calls a god named Bhaga to protect us. The unable stota asks for the gemstone from the clitoris. (6)

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 38
शं नो॑ भवन्तु वा॒जिनो॒ हवे॑षु दे॒वता॑ता मि॒तद्र॑वः स्व॒र्काः । ज॒म्भय॒न्तोऽहिं॒ वृकं॒ रक्षां॑सि॒ सने॑म्य॒स्मद्यु॑यव॒न्नमी॑वाः ॥ (७)
यज्ञ के स्तोत्रों के समय सीमित गति एवं शोभन अन्न वाले वाजी नामक देव हमें सुख देने वाले हों. वे हननकर्तता एवं चोर राक्षसो को नष्ट करते हुए पुराने रोगों को हमसे पृथकू करें. (७)
At the time of the hymns of yajna, the god named Vaaji with limited speed and shobhan anna should be the one to give us happiness. They separate the old diseases from us, destroying the demons of abuse and thieves. (7)

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 38
वाजे॑वाजेऽवत वाजिनो नो॒ धने॑षु विप्रा अमृता ऋतज्ञाः । अ॒स्य मध्वः॑ पिबत मा॒दय॑ध्वं तृ॒प्ता या॑त प॒थिभि॑र्देव॒यानैः॑ ॥ (८)
हे बुद्धिमान्‌, मरणरहित एवं सत्य को जानने वाले वाजी नामक देवो! तुम धन के कारण होने वाले प्रत्येक युद्ध में हमारी रक्षा करो. तुम इस सोम को पीकर प्रमुदित बनो एवं देवयान मार्गो द्वारा जाओ. (८)
O wise, undealed and devo of the truth! You protect us in every war that is caused by money. You drink this mon and become merry and go by Devyana Margao. (8)