हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.39.3

मंडल 7 → सूक्त 39 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 39
ज्म॒या अत्र॒ वस॑वो रन्त दे॒वा उ॒राव॒न्तरि॑क्षे मर्जयन्त शु॒भ्राः । अ॒र्वाक्प॒थ उ॑रुज्रयः कृणुध्वं॒ श्रोता॑ दू॒तस्य॑ ज॒ग्मुषो॑ नो अ॒स्य ॥ (३)
वसुगण इस यज्ञ में धरती पर रमण करें. विस्तृत अंतरिक्ष में स्थित एवं दीप्तिशाली मरुतों की सेवा होती है. हे तेज चलने वाले वसुओ एवं मरुतो! तुम अपना मार्ग हमारे सामने करो. अपने समीप गए हुए हमारे इस दूत की पुकार सुनो. (३)
Vasugana should rejoice on earth in this yajna. Located in wide space and radiant, there is a service of maruts. O fast-moving Vasuo and Maruto! You make your way before us. Listen to the call of this messenger of ours who has come near you. (3)