हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.40.4

मंडल 7 → सूक्त 40 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 40
अ॒यं हि ने॒ता वरु॑ण ऋ॒तस्य॑ मि॒त्रो राजा॑नो अर्य॒मापो॒ धुः । सु॒हवा॑ दे॒व्यदि॑तिरन॒र्वा ते नो॒ अंहो॒ अति॑ पर्ष॒न्नरि॑ष्टान् ॥ (४)
यज्ञ को प्राप्त करने वाले ये शक्तिशाली वरुण, मित्र एवं अर्यमा देव हमारे यज्ञकर्म को धारण करते हैं. किसी के द्वारा न रुक सकने वाली अदिति देवी हमारी पुकार सुने. ये देव हमें बाधा पहुंचाए बिना हमारे पापों को नष्ट करें. (४)
These powerful Varunas, friends and Aryama Devas who attain the yajna hold our yajnakarma. Aditi Devi, who can't stop by anyone, listen to our call. May these gods destroy our sins without hindering us. (4)