हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.46.2

मंडल 7 → सूक्त 46 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 46
स हि क्षये॑ण॒ क्षम्य॑स्य॒ जन्म॑नः॒ साम्रा॑ज्येन दि॒व्यस्य॒ चेत॑ति । अव॒न्नव॑न्ती॒रुप॑ नो॒ दुर॑श्चरानमी॒वो रु॑द्र॒ जासु॑ नो भव ॥ (२)
रुद्र को स्वर्ग एवं पृथ्वी पर रहने वाले ऐश्वर्य द्वारा जाना जा सकता है. हे रुद्र! हमारी प्रजाएं तुम्हारी स्तुतियां करती हैं. तुम उनकी रक्षा करते हुए हमारे घर आओ एवं उसे रोगहीन बनाओ. (२)
Rudra can be known by the splendor who lives in heaven and earth. Hey Rudra! Our people praise you. You protect them, come to our house and make him diseaseless. (2)