हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.52.2

मंडल 7 → सूक्त 52 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 52
मि॒त्रस्तन्नो॒ वरु॑णो मामहन्त॒ शर्म॑ तो॒काय॒ तन॑याय गो॒पाः । मा वो॑ भुजेमा॒न्यजा॑त॒मेनो॒ मा तत्क॑र्म वसवो॒ यच्चय॑ध्वे ॥ (२)
मित्र एवं वरुण हमें प्रसिद्ध सुख दें एवं हमारे पुत्र-पौत्रों की रक्षा करें. दूसरे के किए हुए अपराध का फल हम न भोगें. हे वसुओ! हम वह कर्म न करें, जिसके कारण तुम नाश कर देते हो. (२)
May friends and Varuna give us famous happiness and protect our sons and grandsons. Let us not bear the fruits of the sin sins of others. O Vasuo! Let us not do what you destroy because of. (2)