हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.55.4

मंडल 7 → सूक्त 55 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 55
त्वं सू॑क॒रस्य॑ दर्दृहि॒ तव॑ दर्दर्तु सूक॒रः । स्तो॒तॄनिन्द्र॑स्य रायसि॒ किम॒स्मान्दु॑च्छुनायसे॒ नि षु स्व॑प ॥ (४)
तुम सूअर को विदीर्ण करो एवं सूअर तुम्हें विदीर्ण करे. इंद्र के स्तोता हम लोगों के पास क्यों आते हो? हमें कष्ट वयों देते हो? तुम सुखपूर्वक सोओ. (४)
You break the pig and the pig will pierce you. Why do we come to indra's stota? Do you hurt us? You sleep happily. (4)