हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.55.6

मंडल 7 → सूक्त 55 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 55
य आस्ते॒ यश्च॒ चर॑ति॒ यश्च॒ पश्य॑ति नो॒ जनः॑ । तेषां॒ सं ह॑न्मो अ॒क्षाणि॒ यथे॒दं ह॒र्म्यं तथा॑ ॥ (६)
जो हमारे प्रदेश में ठहरता है, चलता है अथवा हमें देखता है, हम उसकी आंखें फोड़ देते हैं. वह घर के समान शांत व निश्चल हो जाता है. (६)
Whoever dwells, walks, or sees us in our land, we break his eyes. He becomes as quiet and quiet as home. (6)