ऋग्वेद (मंडल 7)
अ॒यं ह॒ यद्वां॑ देव॒या उ॒ अद्रि॑रू॒र्ध्वो विव॑क्ति सोम॒सुद्यु॒वभ्या॑म् । आ व॒ल्गू विप्रो॑ ववृतीत ह॒व्यैः ॥ (४)
हे सुंदर अश्चिनीकुमारो! तुम्हारी अभिलाषा से सोमलता कूटने वाला पत्थर ऊंचा शब्द करता है, उस समय मेधावी ऋत्विजू तुम्हें हव्यों द्वारा आकर्षित करता है. (४)
O beautiful ashchinikumaro! The stone that is somatic with your desire makes the word high, at that time the brilliant Ritwizu attracts you with the havyas. (4)