ऋग्वेद (मंडल 7)
अता॑रिष्म॒ तम॑सस्पा॒रम॒स्य प्रति॒ स्तोमं॑ देव॒यन्तो॒ दधा॑नाः । पु॒रु॒दंसा॑ पुरु॒तमा॑ पुरा॒जाम॑र्त्या हवते अ॒श्विना॒ गीः ॥ (१)
हम देवों की अभिलाषा से स्तुतियां बोलते हुए अंधकार के पार जावें. हे अनेक कर्मो वाले, परम विशाल, पहले उत्पन्न हुए एवं मरणरहित अश्चिनीकुमारो! स्तोता तुम्हें बुलाता है. (१)
Let us go beyond the darkness by speaking praises with the will of the gods. O many of you who have done, the most great, have been born first and dieless Aschinikumaros! Stota calls you. (1)