ऋग्वेद (मंडल 7)
आ प॒श्चाता॑न्नास॒त्या पु॒रस्ता॒दाश्वि॑ना यातमध॒रादुद॑क्तात् । आ वि॒श्वतः॒ पाञ्च॑जन्येन रा॒या यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः ॥ (५)
हे अश्चिनीकुमारो! तुम पूर्व, पश्चिम, उत्तर एवं दक्षिण से आओ. तुम पांच वर्णो का हित करने वाली संपत्ति के साथ सब ओर से आओ. हे देवो! कल्याणसाधनों द्वारा तुम सदा हमारी रक्षा करो. (५)
O aschinikumaro! You come from east, west, north and south. You come from all sides with a property that interests five characters. Oh, God! You always protect us by means of well-being. (5)