हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.81.4

मंडल 7 → सूक्त 81 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 81
उ॒च्छन्ती॒ या कृ॒णोषि॑ मं॒हना॑ महि प्र॒ख्यै दे॑वि॒ स्व॑र्दृ॒शे । तस्या॑स्ते रत्न॒भाज॑ ईमहे व॒यं स्याम॑ मा॒तुर्न सू॒नवः॑ ॥ (४)
हे अंधकारनाशिनी एवं महिमाशालिनी महादेवी उषा! तुम सब जग को जगाने एवं देखने में समर्थ बनाती हो. हे रत्नस्वामिनी! हम तुमसे याचना करते हैं. हम तुम्हें माता के लिए पुत्र के समान प्रिय हों. (४)
O Darknessashini and Mahishalini Mahadevi Usha! You all enable the world to wake up and see. O Ratnaswamini! We beg of you. May we love you as a son to the mother. (4)