हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.85.1

मंडल 7 → सूक्त 85 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 85
पु॒नी॒षे वा॑मर॒क्षसं॑ मनी॒षां सोम॒मिन्द्रा॑य॒ वरु॑णाय॒ जुह्व॑त् । घृ॒तप्र॑तीकामु॒षसं॒ न दे॒वीं ता नो॒ याम॑न्नुरुष्यताम॒भीके॑ ॥ (१)
हे इंद्र एवं वरुण! मैं तुम्हारे उद्देश्य से अग्नि में सोम की आहुति फेंकता हुआ उषा देवी के समान प्रदीप्त अवयव वाली एवं राक्षसों से असंपृक्त स्तुति अर्पित करता हूं. इंद्र व वरण युद्ध में हमारी रक्षा करें. (१)
O Indra and Varuna! For your purpose, I offer an uncultured praise from demons and with a bright element like Usha Devi, throwing the offering of Som in the agni. Protect us in the battle of Indra and Varan. (1)