हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.88.3

मंडल 7 → सूक्त 88 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 88
आ यद्रु॒हाव॒ वरु॑णश्च॒ नावं॒ प्र यत्स॑मु॒द्रमी॒रया॑व॒ मध्य॑म् । अधि॒ यद॒पां स्नुभि॒श्चरा॑व॒ प्र प्रे॒ङ्ख ई॑ङ्खयावहै शु॒भे कम् ॥ (३)
जिस समय मैं और वरुण नाव पर सवार हुए थे. नाव को हमने सागर के बीच चलाया था एवं जल पर तैरती हुई नाव पर हम थे, उस समय हमने नावरूपी झूले पर सुख के निमित्त क्रीड़ा की थी. (३)
At the time varun and i boarded the boat. We had driven the boat in the middle of the ocean and we were on the boat floating on the water, at that time we played for pleasure on the boat swing. (3)