हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.88.5

मंडल 7 → सूक्त 88 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 88
क्व१॒॑ त्यानि॑ नौ स॒ख्या ब॑भूवुः॒ सचा॑वहे॒ यद॑वृ॒कं पु॒रा चि॑त् । बृ॒हन्तं॒ मानं॑ वरुण स्वधावः स॒हस्र॑द्वारं जगमा गृ॒हं ते॑ ॥ (५)
हे वरुण! हमारी पुरातन मित्रता कहां हुई थी? हम उसी पुरानी एवं विनाशरहित मित्रता को निभा रहे हैं. हे अन्नस्वामी वरुण! मैं तुम्हारे अति विस्तृत एवं द्वारों वाले घर में जाऊं. (५)
Hey Varun! Where was our old friendship? We are maintaining the same old and unforgettable friendship. O Annaswamy Varuna! I will go to your very wide and door-to-door house. (5)