हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.89.3

मंडल 7 → सूक्त 89 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 89
क्रत्वः॑ समह दी॒नता॑ प्रती॒पं ज॑गमा शुचे । मृ॒ळा सु॑क्षत्र मृ॒ळय॑ ॥ (३)
हे धनस्वामी एवं निर्मल वरुण! मैं असमर्थता के कारण कर्त्तव्य कर्मो का विरोधी बना हूं. हे शोभनधन वाले वरुण! मुझे सुखी बनाओ एवं मुझ पर दया करो. (३)
O Dhanaswami and Nirmal Varuna! I have become an opponent of duty because of my inability. O Varun with obhavana! Make me happy and have mercy on me. (3)