ऋग्वेद (मंडल 7)
ए॒ता अ॑ग्न आशुषा॒णास॑ इ॒ष्टीर्यु॒वोः सचा॒भ्य॑श्याम॒ वाजा॑न् । मेन्द्रो॑ नो॒ विष्णु॑र्म॒रुतः॒ परि॑ ख्यन्यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः ॥ (८)
हे अग्नि! शीघ्रतापूर्वक इस यज्ञ का सहारा लेते हुए हम एक साथ तुम्हारे द्वारा दिया हुआ अन्न प्राप्त करें. इंद्र, विष्णु एवं मरुद्गण हमें त्यागकर दूसरे को न देखें. हे देवो! तुम कल्याणसाधनों द्वारा सदा हमारी रक्षा करो. (८)
O agni! Quickly resort to this yajna, let us together get the food you have given us. Indra, Vishnu and the Deserts should not forsake us and look at others. Oh, God! You always protect us by means of welfare. (8)