ऋग्वेद (मंडल 7)
उ॒क्थेभि॑र्वृत्र॒हन्त॑मा॒ या म॑न्दा॒ना चि॒दा गि॒रा । आ॒ङ्गू॒षैरा॒विवा॑सतः ॥ (११)
हम उवथों, स्तुतियों एवं स्तोत्रों द्वारा शत्रुनाशकों में श्रेष्ठ एवं अतिशय प्रसन्न इंद्र एवं अग्नि की सेवा करते हैं. (११)
We serve Indra and Agni, the best and the most happy of the enemies through hymns, hymns and hymns. (11)