हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.94.2

मंडल 7 → सूक्त 94 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 94
श‍ृ॒णु॒तं ज॑रि॒तुर्हव॒मिन्द्रा॑ग्नी॒ वन॑तं॒ गिरः॑ । ई॒शा॒ना पि॑प्यतं॒ धियः॑ ॥ (२)
हे इंद्र एवं अग्नि! तुम स्तोता की पुकार सुनो और उसकी स्तुति स्वीकार करो. तुम सबके स्वामी हो, इसलिए यज्ञकर्म को पूरा करो. (२)
O Indra and Agni! You listen to the call of the Psalms and accept his praise. You are the master of all, so complete the yajnakarma. (2)