हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.94.4

मंडल 7 → सूक्त 94 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 94
इन्द्रे॑ अ॒ग्ना नमो॑ बृ॒हत्सु॑वृ॒क्तिमेर॑यामहे । धि॒या धेना॑ अव॒स्यवः॑ ॥ (४)
हम अपनी रक्षा की अभिलाषा से विस्तृत हव्यरूप अन्न, शोभनस्तुति एवं यज्ञकर्म- सहित-स्तुतिवचन इंद्र एवं अग्नि के पास भेजते हैं. (४)
We send the praises to Indra and Agni, with the intention of protecting us, to Indra and Agni, with the intention of protecting us. (4)