हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.1.32

मंडल 8 → सूक्त 1 → श्लोक 32 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 1
य ऋ॒ज्रा मह्यं॑ माम॒हे स॒ह त्व॒चा हि॑र॒ण्यया॑ । ए॒ष विश्वा॑न्य॒भ्य॑स्तु॒ सौभ॑गास॒ङ्गस्य॑ स्व॒नद्र॑थः ॥ (३२)
जिस आसंग राजा ने मुझ मेधातिथि को स्वर्णजटित चर्मास्तरण के सहित गतिशील धन दिया था, उस आसंग का शब्द करने वाला रथ शन्रुओं की सभी संपत्तियों को जीत ले. (३२)
The asang king who gave me the moving wealth, including the golden-plated charmastran, the chariot that used to say asang, conquer all the properties of the Shanrus. (32)