हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.11.7

मंडल 8 → सूक्त 11 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 11
आ ते॑ व॒त्सो मनो॑ यमत्पर॒माच्चि॑त्स॒धस्था॑त् । अग्ने॒ त्वांका॑मया गि॒रा ॥ (७)
हे अग्नि! वत्सगोत्रीय ऋषि तुम्हारे उत्तम निवास स्थान से तुम्हें बुला लेते हैं. वे अपनी स्तुति द्वारा हमारी कामना करते हैं. (७)
O agni! The sage Vatsagotriya calls you from your best abode. They wish us by their praise. (7)