ऋग्वेद (मंडल 8)
उ॒त स्व॒राजे॒ अदि॑तिः॒ स्तोम॒मिन्द्रा॑य जीजनत् । पु॒रु॒प्र॒श॒स्तमू॒तय॑ ऋ॒तस्य॒ यत् ॥ (१४)
अदिति ने अपनी रक्षा के विचार से स्वयं प्रदीप्त के लिए बहुतों द्वारा प्रशंसित एवं यज्ञ संबंधी स्तोत्र उत्पन्न किया था. (१४)
Aditi had produced many acclaimed and sacrificial hymns for her own enlightenment with the idea of protecting herself. (14)