हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.12.18

मंडल 8 → सूक्त 12 → श्लोक 18 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 12
यद्वासि॑ सुन्व॒तो वृ॒धो यज॑मानस्य सत्पते । उ॒क्थे वा॒ यस्य॒ रण्य॑सि॒ समिन्दु॑भिः ॥ (१८)
हे सज्जनों के पालक इंद्र! तुम सोमरस निचोड़ने वाले जिस यजमान को बढ़ाते हो एवं मंत्रों से प्रसन्न होते हो, उसका सोमरस पीकर प्रमुदित बनो. (१८)
O lord of the gentlemen Indra! Be merry by drinking the somras of the somas that you raise and are pleased with the mantras. (18)