हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.12.26

मंडल 8 → सूक्त 12 → श्लोक 26 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 12
य॒दा वृ॒त्रं न॑दी॒वृतं॒ शव॑सा वज्रि॒न्नव॑धीः । आदित्ते॑ हर्य॒ता हरी॑ ववक्षतुः ॥ (२६)
हे वज्रधारी इंद्र! तुमने जल को रोकने वाले वृत्र को जिस समय मारा था, उसी समय तुम्हारे सुंदर घोड़ों ने तुम्हें ढोया था. (२६)
O thunderbolt Indra! At the time you hit the water-stopping vritra, your beautiful horses carried you. (26)