ऋग्वेद (मंडल 8)
य॒दा ते॒ मारु॑ती॒र्विश॒स्तुभ्य॑मिन्द्र नियेमि॒रे । आदित्ते॒ विश्वा॒ भुव॑नानि येमिरे ॥ (२९)
हे इंद्र! जब तुम्हारी मरुद्गणरूपी प्रजा तुम्हारे लिए सब प्राणियों को नियम में बांधती हैं, उसी के बाद तुम सारे विश्व को नियमित करते हो. (२९)
O Indra! When your desert people bind all beings to you in the law, then you regulate the whole world. (29)