हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.13.12

मंडल 8 → सूक्त 13 → श्लोक 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 13
इन्द्र॑ शविष्ठ सत्पते र॒यिं गृ॒णत्सु॑ धारय । श्रवः॑ सू॒रिभ्यो॑ अ॒मृतं॑ वसुत्व॒नम् ॥ (१२)
हे शक्तिशालियों में श्रेष्ठ एवं सज्जनों के पालक इंद्र! हम स्तुति करने वालों को धन दो एवं स्तोताओं को मरणरहित तथा व्यापक यश दो. (१२)
O Indra, the best of the mighty and the father of the gentlemen! Let us give money to those who praise and give deathless and comprehensive glory to the psalms. (12)