ऋग्वेद (मंडल 8)
इन्द्रं॑ वर्धन्तु नो॒ गिर॒ इन्द्रं॑ सु॒तास॒ इन्द॑वः । इन्द्रे॑ ह॒विष्म॑ती॒र्विशो॑ अराणिषुः ॥ (१६)
हमारी स्तुतियां एवं निचोड़े हुए सोमरस इंद्र को बढ़ावें. हव्य धारण करने वाली प्रजाएं इंद्र के प्रति श्रद्धा रखती हैं. (१६)
May our praises and squeezed somers raise Indra. The people who hold the havya have reverence for Indra. (16)