हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.13.27

मंडल 8 → सूक्त 13 → श्लोक 27 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 13
इ॒ह त्या स॑ध॒माद्या॑ युजा॒नः सोम॑पीतये । हरी॑ इन्द्र प्र॒तद्व॑सू अ॒भि स्व॑र ॥ (२७)
हे इंद्र! तुम अपने प्रसिद्ध, सम्मिलित रूप से प्रसन्न एवं विस्तृत धन वाले घोड़ों को रथ में जोड़ कर इस यज्ञ में सोमरस पीने के लिए आओ. (२७)
O Indra! You add your famous, jointly happy and wide-rich horses to the chariot and come to drink the somras in this yajna. (27)