हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.14.2

मंडल 8 → सूक्त 14 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 14
शिक्षे॑यमस्मै॒ दित्से॑यं॒ शची॑पते मनी॒षिणे॑ । यद॒हं गोप॑तिः॒ स्याम् ॥ (२)
हे शक्तिशाली इंद्र! यदि तुम्हारी कृपा से मैं गायों का स्वामी बन जाउं तो इस स्तोता को देने की इच्छा करूंगा एवं इसके द्वारा मांगी हुई संपत्ति दूंगा. (२)
O mighty Indra! If by your grace I become the master of the cows, I will wish to give this hymn and give the property demanded by it. (2)