हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.15.7

मंडल 8 → सूक्त 15 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 15
तव॒ त्यदि॑न्द्रि॒यं बृ॒हत्तव॒ शुष्म॑मु॒त क्रतु॑म् । वज्रं॑ शिशाति धि॒षणा॒ वरे॑ण्यम् ॥ (७)
हे इंद्र! यह स्तुति तुम्हारे बल को विस्तृत करती है. तुम्हारा बल तुम्हारे कर्मो एवं वज्र को तेज करता है. (७)
O Indra! This praise broadens your strength. Your strength accelerates your deeds and thunderbolts. (7)