हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.16.10

मंडल 8 → सूक्त 16 → श्लोक 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 16
प्र॒णे॒तारं॒ वस्यो॒ अच्छा॒ कर्ता॑रं॒ ज्योतिः॑ स॒मत्सु॑ । सा॒स॒ह्वांसं॑ यु॒धामित्रा॑न् ॥ (१०)
इंद्र अभिमुख होकर प्रशंसनीय धन देने वाले, युद्धों में जयरूपी प्रकाश करने वाले एवं युद्ध के द्वारा शत्रुओं को हराने वाले हैं. (१०)
Indra is the one who gives praiseworthy money, who gives glory in wars, who gives glory in wars, and defeats enemies through war. (10)