हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.16.6

मंडल 8 → सूक्त 16 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 16
तमिच्च्यौ॒त्नैरार्य॑न्ति॒ तं कृ॒तेभि॑श्चर्ष॒णयः॑ । ए॒ष इन्द्रो॑ वरिव॒स्कृत् ॥ (६)
मनुष्य शक्तिशाली स्तोत्रों एवं यज्ञकर्मो द्वारा उन्हीं इंद्र को स्वामी बनाते हैं. इंद्र ही स्तोताओं को धन देने वाले हैं. (६)
Human beings make the same Indra masters through powerful hymns and yagnakarmas. Indra is the one who gives money to the stoetas. (6)