हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 17
आ या॑हि सुषु॒मा हि त॒ इन्द्र॒ सोमं॒ पिबा॑ इ॒मम् । एदं ब॒र्हिः स॑दो॒ मम॑ ॥ (१)
हे इंद्र! आओ तुम्हारे लिए हम सोमरस निचोड़ते हैं. तुम इस सोम को पिओ एवं हमारे द्वारा बिछाए गए इन कुशों पर बैठो. (१)
O Indra! Come for you let us squeeze the somras. You drink this mon and sit on these kushas laid down by us. (1)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 17
आ त्वा॑ ब्रह्म॒युजा॒ हरी॒ वह॑तामिन्द्र के॒शिना॑ । उप॒ ब्रह्मा॑णि नः श‍ृणु ॥ (२)
हे इंद्र! मंत्र के कारण रथ में जुड़ने वाले एवं केशों से युक्त घोड़े तुम्हें यहां लावें. इस यज्ञ में आकर तुम हमारी स्तुतियां सुनो. (२)
O Indra! Because of the mantra, the horses that join the chariot and have hair should bring you here. Come to this yajna and listen to our praises. (2)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 17
ब्र॒ह्माण॑स्त्वा व॒यं यु॒जा सो॑म॒पामि॑न्द्र सो॒मिनः॑ । सु॒ताव॑न्तो हवामहे ॥ (३)
हे इंद्र! सोमरस से युक्त व सोमरस निचोड़ने वाले हम स्तोता योग्य स्लुतियों द्वारा तुम सोमपान करने वाले को बुलाते हैं. (३)
O Indra! We, consisting of somras and squeezing somras, call you the one who does sompan by stota worthy sluties. (3)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 17
आ नो॑ याहि सु॒ताव॑तो॒ऽस्माकं॑ सुष्टु॒तीरुप॑ । पिबा॒ सु शि॑प्रि॒न्नन्ध॑सः ॥ (४)
हे इंद्र! सोमरस निचोड़ने वाले हम लोगों के सामने आओ एवं हमारी स्तुतियां सुनो. हे शोभन शिरस्त्राण वाले इंद्र! सोमरूप हव्य का भोग करो. (४)
O Indra! Come before us who squeeze somras and listen to our praises. O Indra with shobhan shirasran! Enjoy the somrup havya. (4)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 17
आ ते॑ सिञ्चामि कु॒क्ष्योरनु॒ गात्रा॒ वि धा॑वतु । गृ॒भा॒य जि॒ह्वया॒ मधु॑ ॥ (५)
हे इंद्र! तुम्हारी दोनों कोखों को मैं सोमरस से पूर्ण करता हूं. सोमरस तुम्हारे शरीर के सभी भोगों को व्याप्त करे. तुम जीभ द्वारा मधुर सोमरस स्वीकार करो. (५)
O Indra! I complete both your wombs with somras. May the somras permeate all the indulgences of your body. You accept the sweet somras by tongue. (5)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 17
स्वा॒दुष्टे॑ अस्तु सं॒सुदे॒ मधु॑मान्त॒न्वे॒३॒॑ तव॑ । सोमः॒ शम॑स्तु ते हृ॒दे ॥ (६)
हे इंद्र! यह माधुर्यपूर्ण सोम तुम्हारे शोभनदान वाले शरीर के लिए अत्यंत स्वाद वाला हो. यह सोम तुम्हारे हृदय के लिए सुखकारक हो. (६)
O Indra! This melody mon is extremely flavored for your adornment body. This mon be pleasing to your heart. (6)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 17
अ॒यमु॑ त्वा विचर्षणे॒ जनी॑रिवा॒भि संवृ॑तः । प्र सोम॑ इन्द्र सर्पतु ॥ (७)
हे विशेष द्रष्टा इंद्र! यह सोम स्त्री के समान ढका हुआ बनकर तुम्हारे समीप जाए. (७)
O special seer Indra! Let this mon be covered like a woman and go near you. (7)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 17
तु॒वि॒ग्रीवो॑ व॒पोद॑रः सुबा॒हुरन्ध॑सो॒ मदे॑ । इन्द्रो॑ वृ॒त्राणि॑ जिघ्नते ॥ (८)
विस्तीर्ण ग्रीवा वाले, बड़े पेट वाले एवं शोभन भुजाओं से युक्त इंद्र सोमरूप हव्य से प्रमत्त होकर शन्रुओं का नाश करते हैं. (८)
Indra Somrup, with a wide neck, with a large stomach and with a dry arms, is blessed with havya and destroys the shanrus. (8)
Page 1 of 2Next →