ऋग्वेद (मंडल 8)
इ॒च्छन्ति॑ दे॒वाः सु॒न्वन्तं॒ न स्वप्ना॑य स्पृहयन्ति । यन्ति॑ प्र॒माद॒मत॑न्द्राः ॥ (१८)
देवता सोमरस निचोड़ने वाले यजमान को चाहते हैं. सोए हुए व्यक्ति को कोई नहीं चाहता. देव तंद्राहीन होकर नशीला सोम प्राप्त करते हैं. (१८)
The deity wants the host to squeeze the Somras. No one wants a sleeping person. Dev gets intoxicated soma by being drowsy. (18)