ऋग्वेद (मंडल 8)
एह हरी॑ ब्रह्म॒युजा॑ श॒ग्मा व॑क्षतः॒ सखा॑यम् । गी॒र्भिः श्रु॒तं गिर्व॑णसम् ॥ (२७)
हव्य अन्न से युक्त एवं सुखकारक घोड़े स्तुतियों द्वारा प्रसिद्ध एवं सेवा करने योग्य मित्र इंद्र को यहां ले आवें. (२७)
May the well-known and serviceable friend Indra be brought here by the praises of the happy and soothing horse hymns. (27)