हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.21.15

मंडल 8 → सूक्त 21 → श्लोक 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 21
मा ते॑ अमा॒जुरो॑ यथा मू॒रास॑ इन्द्र स॒ख्ये त्वाव॑तः । नि ष॑दाम॒ सचा॑ सु॒ते ॥ (१५)
हे इंद्र! तुम जैसे देव की मित्रता के प्रति अज्ञानी बनकर हम सोमरस निचोड़ना न छोड़ दें. हम सोमरस निचोड़ने के बाद एक जगह बैठेंगे. (१५)
O Indra! By becoming ignorant of god's friendship like you, let us not stop squeezing somras. We will sit in one place after squeezing the somras. (15)